पुरूषों की सामान्य सेक्स समस्याएं !








पुरूषों की सामान्य सेक्स समस्याएं
वयस्क एवं शादीशुदा मर्द अक्सर किसी सेक्स समस्या (Sex Problem) से जूझ रहे होते हैं या किसी वजह से भ्रम में सेक्स को लेकर गलत धारणा की स्थिति में रहते हैं। वयस्क लड़कों की सबसे बड़ी समस्या और भ्रम की स्थिति हस्तमैथुन (Effects Of Masturbation), शीघ्रपतन और स्वप्नदोष को लेकर है। दूसरी ओर शादीशुदा पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम होना एक गंभीर बीमारी है। शुक्राणु की कमी को अल्पशुक्राणुता (Oligospermia) कहते हैं जिससे संतान पैदा करने की क्षमता तक कम हो सकती है। कई पुरूषों के वीर्य में शुक्राणु ही नहीं होते। इस स्थिति को अशुक्राणुता (Azoospermia) कहा जाता है। इस समस्या के होने पर पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। उम्र के बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन का स्तर कम हो जाता है और इसके कारण सेक्स इच्छा में कमी भी हो सकती है।

महिलाओं में सबसे अधिक शिकायत यौनेच्छा की कमी की होती है। कई महिलाओं में अक्सर यह शिकायत देखी जाती है कि उसे सेक्स करने में बिल्कुल भी रूचि नहीं होती, जो एक गंभीर सेक्स समस्या है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, गुप्त अंग की ठीक से सफाई न करना आदि भी महिलाओं की मुख्य सेक्स समस्याएँ हैं।

पुरूषों की सामान्य सेक्स समस्याएं (Common Sex Problems in Males)
लिंग का आकार (Size of Penis):- आकार से फर्क पड़ता है या नहीं? इस प्रश्न के वैज्ञानिक पहलू भले अलग हैं लेकिन आम मर्दों की मानसिकता में साइज को लेकर काफी भ्रम है। लिंग के आकार में बदलाव के लिए कई कारक जिम्मेवार होते हैं। उत्तेजना, कमरे का तापमान, दिन या रात, सेक्सुअल फ़्रीक्वेंसी जैसी कुछ चीजों पर भी निर्भर करता है आपके लिंग का आकार (Size of Penis)। उत्तेजना के समय अगर आपका लिंग 3 इंच से बड़ा है तो समझिए यह सामान्य है और यह औरत को संतुष्ट करने में सक्षम है। महिलाओं के गुप्त अंग में केवल तीन इंच की गहराई तक ही संवेदन या आनंद महसूस करने वाले संवेदनशील अंग क्लाइटोरिस होते हैं।

स्वप्नदोष (Nightfall):- पहले तो मन से यह शंका निकाल दीजिए कि स्वप्नदोष कोई बीमारी है। यह कोई दोष नहीं है, जैसे एक निश्चित आयु के बाद लड़कियों में मासिक धर्म आना जरूरी होता है उस पर लड़कियों का कोई नियंत्रण नहीं होता है, ऐसे ही लड़कों में इरेक्शन होना सामान्य है। नींद में यदि मनुष्य के गुप्त अंग को बिस्तर आदि की रगड़ लग जाए या फिर उसे कामुक स्वप्न आ जाए तो वीर्य स्खलित हो जाता है।

हस्तमैथुन (Masturbation):- यह बहुत सामान्य प्रक्रिया है और मानव जीवन के आरम्भ से ही पुरुष इसे करता आ रहा है, न सिर्फ लड़कों में बल्कि लड़कियों में भी। आश्चर्य की बात तो यह है कि जो इसे करते हैं वे भी अक्सर इसे गलत मानते हैं लेकिन इसे छोड़ नहीं पाते हैं। हस्तमैथुन (Masturbation) के बाद काम भावना शून्य हो जाती है इसलिए यह एक सीमा तक करना ही ठीक रहता है।

शीघ्रपतन (Early Ejaculation):- सेक्स करने से पहले स्खलित हो जाने को शीघ्रपतन (Early Ejaculation)

·        बहुत सारे पुरुष अपने लिंग के आकार को लेकर भी परेशान रहते हैं और हीन भावना का भी शिकार हो जाते हैं.
जबकि सच्चाई यह है कि आपके लिंग का आकार बड़ा हो या छोटा आप अपने साथी को पूरी तरह संतुष्ट कर सकते हैं. तो अब आपको लिंग के आकार के बारे में चिंतित होने की जरूरत नहीं है.
·        स्त्रियों में सबसे अधिक शिकायत यौन इच्छा की कमी की होती है. कई बार रजोनिवृत्ति से पहले या
रजोनिवृत्ति के बाद इस समस्या का सामना करना पड़ता है. इस समस्या का सबसे अच्छा इलाज है
कि आपको रोमांटिक बनना पड़ेगा.
·        कई महिलाओं को सम्भोग के दौरान जब लिंग योनी में जाता है तो असहनीय पीड़ा होती है.
योनि में सूखेपन, सूजन या इंफेक्शन के कारण यह समस्या हो सकती है. इसके लिए आप
एक अच्छा लुब्रिकेंट का उपयोग कर सकती हैं. अगर इससे भी आराम ना हो तो डॉक्टर की
सलाह लेनी चाहिए.
·        सम्भोग के दौरान चर्मोत्कर्ष या पूर्ण संतुष्टि नहीं होना भी महिलाओं में एक आम समस्या है.
पूर्ण संतुष्टि पाने के लिए आपको मानसिक रूप से ख़ुशी-ख़ुशी सेक्स के लिए तैयार रहना होगा.
सम्बन्ध बनाने से पहले पुरुष को चाहिए कि वह स्त्री को उत्तेजित करे फिर सम्बन्ध बनाए.
·        महिलाओं में मासिकधर्म के समय अधिक रक्त आना, असहनीय दर्द होना, मेनोपॉज के बाद भी
रक्त स्त्राव होना गर्भाशय में कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. गर्भाशय को ऑपरेशन के द्वारा निकालकर
इसे ठीक किया जा सकता है.
·        फाइब्रायड यानि ट्यूमर का होना भी महिलाओं की एक बीमारी है. इस बीमारी से बांझपन का
खतरा पैदा हो जाता है.

·        योनि से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा लिक्विड निकलना श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया कहलाता है. इस बीमारी का भी समय रहते इलाज कर लेना चाहिए.
·        पुरुषों के लिंग में उत्तेजना आना, या उत्तेजना आकर जल्दी हीं खत्म हो जाना, या उत्तेजना आते ही वीर्य निकल जाना पुरूषों की सामान्य समस्या बन गई है. अच्छे खानपान और अन्य तरीकों से इसे सुधारा जा सकता है.
·        पुरूष का स्त्री के सामने आते हीं वीर्य निकल जाना भी एक समस्या है, इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण आत्मविश्वास में कमी तथा अत्यधिक कामुक होना है.
·        पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं का कम होना शुक्राणु अल्पता (ओलिगोस्पर्मिया) कहलाता है.
·        कुछ पुरूषों के वीर्य में शुक्राणु होते हीं नहीं हैं, इसे एज़ूस्पर्मिया कहा जाता है. इस समस्या के होने पर
पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं.
·        पुरूषों में उम्र के बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन कम हो जाता है और इसके कारण सेक्स
इच्छा में कमी हो सकती है.

·        योनी में संक्रमण भी महिलाओं की एक आम समस्या है. इसके निम्न कारण हो सकते हैं :
सम्बन्ध बनाने से पहले साथी के लिंग की सफाई नहीं जांचना, इन्फेक्शन, योनी की ठीक से सफाई होना,
कब्ज रहना और साथी के यौनांग में इन्फेक्शन होना.
·        योनी और लिंग के बालों की अच्छे से धुलाई करनी चाहिए. क्योंकि अगर योनी के बाल साफ नहीं होंगे,
तो योनी के बाल के कीटाणु योनि में घुसकर कई योनि और गर्भाशय संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं.
और पुरुष को भी अपने लिंग के बालों को साफ रखना चाहिए क्योंकि उसके द्वारा उसके साथी को भी संक्रमण हो सकता है.
·        कई बार स्तनों में दर्द को लडकियाँ नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन स्तन के गांठ आदि की जाँच
करती रहनी चाहिए ताकि आपको स्तन कैंसर हो.
·         


स्त्रियों में सबसे अधिक शिकायत यौन इच्छा की कमी की होती है. कई बार रजोनिवृत्ति से पहले या रजोनिवृत्ति के बाद इस समस्या का सामना करना पड़ता है. इस समस्या का सबसे अच्छा इलाज है कि आपको रोमांटिक बनना पड़ेगा. • कई महिलाओं को सम्भोग के दौरान जब लिंग योनी में जाता है तो असहनीय पीड़ा होती है. योनि में सूखेपन, सूजन या इंफेक्शन के कारण यह समस्या हो सकती है. इसके लिए आप एक अच्छा लुब्रिकेंट का उपयोग कर सकती हैं. अगर इससे भी आराम ना हो तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. • सम्भोग के दौरान चर्मोत्कर्ष या पूर्ण संतुष्टि नहीं होना भी महिलाओं में एक आम समस्या है. पूर्ण संतुष्टि पाने के लिए आपको मानसिक रूप से ख़ुशी-ख़ुशी सेक्स के लिए तैयार रहना होगा. सम्बन्ध बनाने से पहले पुरुष को चाहिए कि वह स्त्री को उत्तेजित करे फिर सम्बन्ध बनाए. • महिलाओं में मासिकधर्म के समय अधिक रक्त आना, असहनीय दर्द होना, मेनोपॉज के बाद भी रक्त स्त्राव होना गर्भाशय में कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. गर्भाशय को ऑपरेशन के द्वारा निकालकर इसे ठीक किया जा सकता है. • फाइब्रायड यानि ट्यूमर का होना भी महिलाओं की एक बीमारी है. इस बीमारी से बांझपन का खतरा पैदा हो जाता है. • योनि से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा लिक्विड निकलना श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया कहलाता है. इस बीमारी का भी समय रहते इलाज कर लेना चाहिए. • पुरुषों के लिंग में उत्तेजना आना, या उत्तेजना आकर जल्दी हीं खत्म हो जाना, या उत्तेजना आते ही वीर्य निकल जाना पुरूषों की सामान्य समस्या बन गई है. अच्छे खानपान और अन्य तरीकों से इसे सुधारा जा सकता है. • पुरूष का स्त्री के सामने आते हीं वीर्य निकल जाना भी एक समस्या है, इस समस्या का सबसे प्रमुख कारण आत्मविश्वास में कमी तथा अत्यधिक कामुक होना है. • पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं का कम होना शुक्राणु अल्पता (ओलिगोस्पर्मिया) कहलाता है. • कुछ पुरूषों के वीर्य में शुक्राणु होते हीं नहीं हैं, इसे एज़ूस्पर्मिया कहा जाता है. इस समस्या के होने पर पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं. • पुरूषों में उम्र के बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन कम हो जाता है और इसके कारण सेक्स इच्छा में कमी हो सकती है. • योनी में संक्रमण भी महिलाओं की एक आम समस्या है. इसके निम्न कारण हो सकते हैं : सम्बन्ध बनाने से पहले साथी के लिंग की सफाई नहीं जांचना, इन्फेक्शन, योनी की ठीक से सफाई होना, कब्ज रहना और साथी के यौनांग में इन्फेक्शन होना. • योनी और लिंग के बालों की अच्छे से धुलाई करनी चाहिए. क्योंकि अगर योनी के बाल साफ नहीं होंगे, तो योनी के बाल के कीटाणु योनि में घुसकर कई योनि और गर्भाशय संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं. और पुरुष को भी अपने लिंग के बालों को साफ रखना चाहिए क्योंकि उसके द्वारा उसके साथी को भी संक्रमण हो सकता है. • कई बार स्तनों में दर्द को लडकियाँ नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन स्तन के गांठ आदि की जाँच करती रहनी चाहिए ताकि आपको स्तन कैंसर हो. •

Common penis problems !

 • Erection or ejaculation problems. These might include the inability to get and keep an erection firm enough for sex (erectile dysfunction) or, uncommonly, a persistent and usually painful erection that isn't caused by sexual stimulation or arousal (priapism). Other concerns include the inability to ejaculate, premature ejaculation, delayed ejaculation, painful ejaculation, reduced ejaculation or retrograde ejaculation, when semen enters the bladder instead of emerging through the penis. • Anorgasmia. In some cases, men might not be able to achieve an orgasm despite adequate stimulation. This might reflect hormonal problems, such as low testosterone, or indicate an underlying problem with the nerves. Medications or diseases such as diabetes might make this condition more likely. • Changes in libido. Reduced desire for sex (libido) can be due to several conditions, including a hormonal imbalance, relationship issues or even depression. Significant and abrupt increases in libido, particularly in older men, might be due to substance use or conditions affecting the brain. Discuss an abrupt change in libido with your doctor. • Sexually transmitted infections. Various sexually transmitted infections can affect the penis, including genital warts, gonorrhea, chlamydia, syphilis and genital herpes. Common signs and symptoms include painful urination, penis discharge, and sores or blisters on the penis or in the genital area. • Problems with the foreskin. A condition known as phimosis occurs when the foreskin on an uncircumcised penis can't be retracted from the penis head. This can lead to infections, as well as cause painful urination and erections. Paraphimosis occurs when the foreskin can't be returned to its normal position after being retracted. This condition can cause painful swelling of the penis and impaired blood flow. • Other diseases and conditions. A yeast infection can cause a reddish rash and white patches on the penis. Inflammation of the head of the penis (balanitis) might cause pain and a foul discharge. Peyronie's disease, a chronic condition that involves the development of abnormal scar tissue in tissues inside the penis, might result in bent or painful erections. Penile cancer — which might begin as a blister on the foreskin, head or shaft of the penis and then become a wart like growth that discharges watery pus — also is a rare possibility.

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 बांझपन की औषधियां हैं। जिनके सेवन से बांझपन दूर हो जाता है। 

संतान की इच्छा भला किस दंपत्ति को नहीं होती। किन्तु कुछ कारणवंश कुछ जोड़े संतान के सुख से वंचित हो जाते हैं। इसके बहुंत से कारन हो सकते हैं। लेकिन आज हम यहाँ स्त्रियों में होनेवाली कमियों की चर्चा करेंगे। संतान होने या गर्भ ठहर पाने की स्थिति को बांझपन (Barrenness , Sterillity ) कहते हैं। पुरुषों के शुक्राणु दोष यानि शुक्राणु की संख्या में कमी और स्त्रियों के रजोदोष के कारण ही ऐसा होता है। अत: बांझपन चिकित्सा में पुरुषों के वीर्य में वीर्य के शुंक्राणुओँ की संख्या को स्वस्थ करने, वीर्य को शुद्ध करने की व्यवस्था करें और स्त्रियों को रजोदोष से मुक्ति करें। इससे संतान की प्राप्ति होगी।


कितने प्रकार का होता हैं बाँझपन :- 

बाँझपन दोष दो प्रकार का होता है। पहला प्राकृतिक जो जन्म से ही होता है। दूसरा जो किसी अंगों के आयी कमी या किन्ही कारणों से हो जाता है। इसमें पहले प्रकार के बांझपन की औषधि नहीं है। दूसरे प्रकार के बांझपन की औषधियां हैं। जिनके सेवन से बांझपन दूर हो जाता है। 

यदि स्त्री को गर्भ रुकने में दिक्कत आती है या और वो गर्भ धारण नहीं कर पाती हो , तो उसे बाँझपन कहते हैं। 

अंदुरुनी कमी के कारण जो बाँझपन होता हैं उसके क्या कारण हो सकते हैं :- 

1 )
पहला कारन यह है कि जिस किसी भी स्त्री में यह समस्या हैं उस स्त्रियों के प्रजनन अंगों सही तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं। 

2 )
बहुँत पुराना अंदुरुनी घाव या किसी दुर्घटना के कारण प्रजनन अंगों में कुछ खराबी का होना  

3 )
ज्यादातर मामलों में पुरुषों के वीर्य में सही मात्रा में शुक्राणु का होना पाया हैं। क्योंकि ऐसे पुरुष जब स्त्रियों से संभोग क्रिया करते हैं तो इनके वीर्य में शुक्राणु होने के कारण स्त्रियों के डिम्ब में शुक्राणु नहीं पहुंचते हैं। इसलिए स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है। यह आजकल के पुरुषों की सामान्य समस्या में से एक हैं

4 )
महिलाओं में अनियमित मासिकधर्म का रोग होने के कारण भी स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है।चिंता, तनाव तथा डर आदि के कारण भी स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है।

5 )
यदि किसी महिला ने गर्भ निरोधक दवा का सेवन अनुचित तरीके से किया है तो भी यह परेशानी सकती हैं। क्योंकि इस तरीके की दवा के सेवन से कभी कभी ऐसा होता है कि महिलाओं के अंडाशय में अंडा बनाने में दिक्कत होने लगती है। 

क्या है घरेलु इलाज़ :- 

1 )
हींग :- यदि किसी महिला के गर्भाशय में गैस भर गई हो तो थोड़ी-सी काली हींग को काली तिलों के तेल में पीसकर तथा उसमें रूई का फाहा भिगोकर तीन दिन तक योनि में रखे। इससे बांझपन का दोष नष्ट हो जाएगा। प्रतिदिन औषधि को ताजा ही पीसना चाहिए।

2)  
हरड़ (हर्रे ) : यदि किसी महिला के गर्भाशय में कीडे़ पड़ गये हों तो हरड़, बहेड़ा, और कायफल, तीनों को साबुन के पानी के साथ सिल पर महीन पीस लें, फिर उसमें रूई का फोहा भिगोकर तीन दिनों तक योनि में रखना चाहिए। इस प्रयोग से गर्भाशय के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

3 )  
कस्तूरी :- यदि किसी स्त्री का गर्भाशय उलट गया हो तो कस्तूरी और केसर को समान मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर गोली बना लें। इस गोली को माहवारी होने के पहले योनि में रखें। इसी प्रकार तीन दिनों तक गोली रखने से गर्भाशय ठीक हो जाता है। 

4 )
दालचीनी : जिस स्त्री के गर्भाधान ही नहीं होता, वह चुटकी भर दालचीनी पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर अपने मसूढ़ों में दिन में कई बार लगायें ध्यान दे की इसे थूंके नहीं। इससे यह लार में मिलकर शरीर में चला जाएगा। ठीक उसी तरह वह पुरुष जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ होता है, यदि प्रतिदिन सोते समय दो बड़े चम्मच दालचीनी ले तो वीर्य में वृद्धि होती है और उसकी यह समस्या दूर हो जाएगी। 


बाँझपन में रखें इस बातों का ख़्याल :- 

👉
इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को अपने इस रोग का इलाज करने के लिए सबसे पहले अपने शरीर से गंदे द्रव्यों को बाहर निकालना चाहिए इसके लिए स्त्री को उपवास रखना चाहिए। इसके बाद उसे 1-2 दिन के बाद कुछ अंतराल पर उपवास करते रहना चाहिए।

👉
स्त्री को गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद एवं नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।

👉
इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को ज्यादा नमक, मिर्च-मसाले, तले-भुने खाने वाले पदार्थ, चीनी, चाय, काफी, मैदा आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

👉
इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को दूध की बजाए दही का इस्तेमाल करना चाहिए।

👉
इसी प्रकार अधिक मदिरा-सेवन, धुम्रपान, आयु , मोटापा, अत्यधिक-तनाव, अनियमित एवं दर्दपूर्ण माहवारी की समस्या, पोषण-रहित भोजन या फिर अत्यधिक शारीरिक-प्रशिक्षण भी स्त्री की गर्भ-धारण क्षमता को प्रभावित करते हैं



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